Monday, 17 December 2012

कोटा बिल की पहली बाधा पार


नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकारी नौकरियों में एससी [अनुसूचित जाति], एसटी [अनुसूचित जनजाति] को प्रोन्नति में आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन विधेयक को आखिरकार सोमवार को राज्य सभा की हरी झंडी मिल गई। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने जहां इसके विरोध में वोट डाला, वहीं शिव सेना इसके खिलाफ मतदान से गैर हाजिर रही। अब इस विधेयक को संसद के दूसरे सदन लोकसभा में पेश किया जाएगा। उधर, इसी मामले पर सपा के विरोध की वजह से लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन बाधित रही।
117वें संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान के दौरान राज्यसभा में कुल 245 में 216 सदस्य मौजूद थे। विधेयक समर्थन में 206 वोट पड़े। जबकि विरोध में कुल दस सदस्यों ने वोट डाले। विरोध में मतदान करने वालों में सपा के नौ सदस्य और एक निर्दलीय मोहम्मद अदीब शामिल हैं। सरकार की ओर से कार्मिक विभाग के राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने यह भरोसा भी दिलाया है कि इस बिल का वर्ष 1995 से पहले के सरकारी कर्मचारियों को मिली प्रोन्नति पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा। उन्होंने यह बात विपक्ष के नेता अरुण जेटली की ओर से आशंका जताए जाने के बाद कही। जेटली ने सरकार से कहा था कि वह यह सुनिश्चित करे कि यह कानून उस तारीख से पहले के लोगों को मिले लाभ को वापस नहीं ले।
सदन में हुई वोटिंग से पहले सपा नेता रामगोपाल यादव ने विधेयक का जोरदार विरोध किया। उन्होंने आशंका जताई कि इस बिल को अदालत में चुनौती दी जा सकती है, जिससे गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि जो लोग इसके पक्ष में वोट कर रहे हैं, उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उन्हीं की पार्टी के नरेश अग्रवाल ने इसे संसद की स्थायी समिति को भेज देने की मांग भी की। जदयू के सदस्यों ने बिल के पक्ष में वोट तो दिया, लेकिन इसके सांसद अली अनवर अंसारी ने मुस्लिम और ईसाई दलितों को भी इसका लाभ देने की मांग की। जबकि उत्तर प्रदेश से निर्दलीय सांसद मोहम्मद अदीब ने बिल का विरोध किया।
राज्य सभा से पारित होने के बाद अब इस बिल को लोकसभा की मंजूरी लेनी होगी। सरकार ने राज्यसभा में भले ही विधेयक को आसानी से पारित करवा लिया हो, लेकिन लोकसभा में उसे मुश्किल आ सकती है। वहां सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अपने 21 अन्य साथियों के साथ इसका जोरदार विरोध करने के लिए मौजूद रहेंगे। जबकि राज्य सभा में बिल पारित हो जाने से बसपा नेता मायावती काफी संतुष्ट दिखाई दीं। इसके तुरंत बाद उन्होंने सदन में मौजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, विपक्ष के नेता अरुण जेटली और माकपा नेता सीताराम येचुरी के पास जाकर उनका धन्यवाद अदा किया।
..और उखड़ गए रामगोपाल
सदन में बेहद सौम्य व सहज तरीके से अपना पक्ष रखने वाले समाजवादी पार्टी के नेता प्रो. रामगोपाल यादव सोमवार को अचानक उखड़ गए। वह भी लोजपा नेता रामविलास पासवान पर। राज्यसभा में प्रोन्नति में आरक्षण पर हो रही चर्चा के दौरान पासवान सपा नेताओं की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने कई दफा सपा का नाम लिया। सदन में अलग-थलग पड़ चुके सपा नेता खीझ में थे ही। रामगोपाल ने सख्त लहजे में पासवान को आड़े हाथों ले लिया। उन्होंने कहा, 'सपा की राजनीतिक हैसियत हमेशा से संसद में यही रही है। लेकिन वे लोग भी सपा का बार-बार नाम लेते हैं, जिनकी संसद में कोई हैसियत नहीं है और जो दूसरों के सहारे यहां पहुंचे हैं। बिहार की जनता ने उनकी राजनीतिक हैसियत बता दी है। फिर भी..।' इस तल्ख टिप्पणी के बीच में ही यादव ने कहा कि सदन में उन्होंने इतनी तल्खी कभी नहीं दिखाई, लेकिन माननीय सदस्य की टिप्पणी ही ऐसी थी, जिसके नाते यह कहना पड़ा।
सपा ने केंद्र से मांगा मुस्लिम आरक्षण
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। समाजवादी पार्टी बहुत चाहकर भी सरकारी नौकरियों में एससी, एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण पर सरकार तो नहीं रोक सकी, लेकिन उसने मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे को हवा जरूर दे दी है। वह भी आबादी के लिहाज से। सपा ने अपनी इस मांग को लेकर राज्यसभा में इतना शोर मचाया कि सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ गई।
सपा के प्रो. रामगोपाल यादव ने सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही इस मामले को उठा दिया। सभापति हामिद अंसारी ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस मामले को शून्यकाल में उठा सकते हैं, लेकिन सपा सदस्य नहीं माने। सपा के नरेश अग्रवाल, अरविंद कुमार सिंह, आलोक तिवारी व अन्य सदस्यों ने सभापति के आसन के पास जाकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस कारण सदन की कार्यवाही आधे घंटे स्थगित कर दी गई। प्रो. रामगोपाल यादव ने 12:00 बजे शून्यकाल में फिर इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा, 'सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से यह साफ हो चुका है कि मुसलमानों की शैक्षिक और सामाजिक स्थिति दलितों से भी बदतर है। जब एससी, एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन हो सकता है तो मुसलमानों को भी उनकी आबादी के लिहाज से नौकरियों में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन किया जाना चाहिए'।
प्रो. यादव ने सरकार से पूछा कि वह यह भी बताए कि सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों के आरक्षण के लिए संविधान [संशोधन] विधेयक कब लाएगी। बाद में राज्यसभा में एससी, एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान [117वां संशोधन] विधेयक पर हुई बहस में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि सपा एससी, एसटी आरक्षण के खिलाफ नहीं है। लेकिन वह प्रोन्नति में आरक्षण के खिलाफ है, क्योंकि उससे दस-बीस साल सीनियर कर्मचारी जूनियर हो जाएंगे। सपा के ही नरेश अग्रवाल ने भी मुसलमानों के आरक्षण की पैरवी की। उन्होंने कहा कि प्रोन्नति में आरक्षण देश के 82 प्रतिशत लोग स्वीकार नहीं करेंगे। आरक्षण का यह मामला राज्यों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। सरकार सुनिश्चित करे कि 50 प्रतिशत की तय सीमा में वह किसे कितना आरक्षण देना चाहती है।
सच्चर कमेटी :-
- देश में मुस्लिमों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक दशा का पता लगाने के लिए सरकार ने 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था
- 2006 में इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की। मुस्लिमों के पिछड़ेपन पर रिपोर्ट पेश करने वाली यह पहली कमेटी थी
- इसमें कहा गया कि देश में मुस्लिमों की स्थिति एससी-एसटी से भी बदतर है
- नौकरशाही में इनका प्रतिनिधित्व महज 2.5 प्रतिशत है जबकि कुल जनसंख्या में मुस्लिम आबादी 14 प्रतिशत से भी ज्यादा है
- इनके हालात को सुधारने के लिए सच्चर कमेटी ने व्यापक सुझाव दिए हैं
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