नई दिल्ली [राजकिशोर]। अगला लोकसभा चुनाव कभी भी हों, लेकिन कांग्रेस अगले साल मार्च-अप्रैल तक पूरी तरह तैयार होगी। संप्रग सरकार ने सामाजिक एजेंडे पर तेजी से बढ़ना शुरू किया है तो कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर लोकसभा चुनाव की तैयारियों को तेज कर दिया है। इस कड़ी में उसने पूरे देश में प्रत्याशियों के चुनाव की प्रक्रिया का पहला चरण भी शुरू कर दिया है। पूरे देश में कांग्रेस नेतृत्व ने उम्मीदवारों के चयन के लिए 54 पर्यवेक्षकों को तैनात कर दिया है। इनकी रिपोर्ट जनवरी 2013 तक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सुपुर्द हो जाएगी।
चौतरफा बने सियासी माहौल के मद्देनजर कांग्रेस नेतृत्व ने प्रशासनिक व सांगठनिक दोनों स्तरों पर बड़े आपरेशन की तैयारी अगस्त-सितंबर से ही शुरू कर दी थी। संप्रग सरकार में सबसे बड़े मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही सांगठनिक स्तर पर भी कील-कांटे दुरुस्त किए जा रहे हैं। मगर कांग्रेस की चुनावी तैयारी सांगठनिक फेरबदल से पहले ही शुरू हो चुकी है। चुनाव समन्वय समिति और उसके तहत तीन उप समूह बनाए जा चुके हैं। इससे भी पहले राहुल गांधी ने पूरे देश में 54 पर्यवेक्षकों को तैनात कर दिया था।
इनमें कुछ विधायक हैं तो कुछ पूर्व सांसद या फिर संगठन के नेता। सबसे बड़ी बात है कि इनकी निष्ठा और ईमानदारी को नेतृत्व ने अपने मानकों के लिहाज से परख लिया है। इनमें से ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिनसे पूरे देश में युवक कांग्रेस के चुनावों के दौरान रिपोर्ट मंगाई गई थी। पूरे देश की 543 संसदीय सीटों के लिहाज से इनकी तैनाती की गई है। इस तरह प्रत्येक पर्यवेक्षक के हिस्से में लगभग 10 संसदीय सीटें आ रही हैं। ये लोग प्रदेश अध्यक्ष या रसूखदार नेताओं से मिलने के बजाय जिला और ब्लाक स्तर तक जाकर सर्वेक्षण कर रहे हैं।
पर्यवेक्षक सिर्फ कांग्रेसियों से ही नहीं, बल्कि उस इलाके के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों या फिर स्थानीय पत्रकारों, गैर सरकारी संगठनों या सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी मिलेंगे। संभावित प्रत्याशियों से भी ज्यादा इनकी रिपोर्ट इलाके की राजनीतिक नब्ज पर आधारित होगी। तीन माह में इन सबको रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंपनी है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अंदरखाने मार्च-अप्रैल तक अपने चुनावी प्रत्याशियों की सूची तैयार कर लेना चाहती है। कुल मिलाकर संसद के अगले बजट सत्र के बाद वह कभी भी चुनाव के लिए तैयार होगी। उत्तर प्रदेश पर इस दफा भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चुनाव समन्वय समिति में शामिल किए गए गुजरात के पूर्व सांसद मधुसूदन मिस्त्री उत्तर प्रदेश के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मिस्त्री ने जिस इलाके की जो रिपोर्ट दी थी, वह नतीजों के काफी करीब रही। लिहाजा, नेतृत्व का उन पर भरोसा जमा और उन्हें पूरी जिम्मेदारी दे दी है।
51 जिलों के कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक 14 को:
पहले चरण में देश के जिन 51 जिलों में सीधे नगदी हस्तांतरण योजना शुरू हो रही है, उन जिलों के कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक राजधानी में 14 दिसंबर को होगी। सब्सिडी की रकम का हस्तांतरण सीधे खातों में करने की योजना के बारे में इन जिलाध्यक्षों के साथ-साथ उन जिलों के युवक कांग्रेस और एनएसयूआइ [राष्ट्रीय छात्र संगठन] के अध्यक्ष भी बुलाए गए हैं। बैठक में राहुल गांधी के साथ-साथ वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश भी रहेंगे। ये सभी जिला स्तर के पदाधिकारियों को योजना के बारे में जानकारी देंगे और कैसे उसे आम आदमी तक पहुंचाकर कांग्रेस को श्रेय दिलाया जाए, इसके गुर भी सिखाएंगे।
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